ऐश्वर्या राज भाकुनी: "मुझे ग्लैमर नहीं, गरिमा वाले किरदारों में है विश्वास" – टाइपकास्टिंग पर खुलकर बोलीं अभिनेत्री
अभिनेत्री ऐश्वर्या राज भाकुनी ने बताया कि कैसे वह ग्लैमर से हटकर गरिमापूर्ण किरदारों को चुनती हैं और टाइपकास्टिंग से बचने के लिए क्या करती हैं।




Key Highlights
- अभिनेत्री ऐश्वर्या राज भाकुनी गरिमा और गहराई वाले किरदारों को प्राथमिकता देती हैं।
- उनका मानना है कि काम में गरिमा होनी चाहिए, सिर्फ ग्लैमर या शॉक वैल्यू नहीं।
- टाइपकास्टिंग से बचने के लिए उन्होंने कई बार प्रोजेक्ट्स ठुकराए हैं।
ग्लैमर से ऊपर गरिमा: ऐश्वर्या राज भाकुनी का बेबाक बयान
मुंबई: टेलीविजन इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना चुकी अभिनेत्री ऐश्वर्या राज भाकुनी, जो जल्द ही ‘तुम देना साथ मेरा’ में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती दिखेंगी, ने हाल ही में अपने करियर विकल्पों और टाइपकास्टिंग के मुद्दे पर खुलकर बात की है। ऐश्वर्या का कहना है कि उनके निर्णय किसी बाहरी दबाव से नहीं, बल्कि एक स्पष्ट उद्देश्य से प्रेरित होते हैं। वह ऐसे किरदार चुनने पर जोर देती हैं जिनमें सतही आकर्षण के बजाय वास्तविक गहराई और गरिमा हो।
"मेरे काम में गरिमा होनी चाहिए"
अपनी भूमिकाओं के चयन को लेकर ऐश्वर्या बेहद सजग रहती हैं। उन्होंने बताया, “मैं इस बात को लेकर बहुत सजग रहती हूं कि मैं किस तरह के किरदार चुन रही हूं। मैं ऐसे रोल्स नहीं करती जिनमें जरूरत से ज्यादा बोल्ड या एक्सप्लिसिट दिखाया जाए। मेरा मानना है कि मेरे काम में एक गरिमा होनी चाहिए, और मैं ऐसे किरदारों को प्राथमिकता देती हूं जिनमें सिर्फ ग्लैमर या शॉक वैल्यू के बजाय कंटेंट हो।” यह दृष्टिकोण उन्हें इंडस्ट्री में एक अलग पहचान दिलाता है।
टाइपकास्टिंग से बचाव: बहुमुखी प्रतिभा बनी ढाल
इंडस्ट्री में टाइपकास्टिंग एक आम समस्या है, लेकिन ऐश्वर्या का अनुभव इसमें भिन्न रहा है। वह बताती हैं, “खुशकिस्मती से मुझे यह दिक्कत नहीं हुई, क्योंकि मैं काफी वर्सेटाइल हूं। मैं एक मासूम ‘बेचारी’ का रोल भी कर सकती हूं, नेगेटिव शेड्स भी निभा सकती हूं और मजबूत पौराणिक किरदार भी। यही विविधता मुझे रिपीटेशन से बचाती है।” उनकी यह क्षमता उन्हें विभिन्न शैलियों में काम करने का अवसर देती है।
चुनौतियां स्वीकार, मूल्यों से समझौता नहीं
नई चुनौतियों के प्रति ऐश्वर्या हमेशा खुली सोच रखती हैं, लेकिन अपने व्यक्तिगत मूल्यों से कोई समझौता नहीं करतीं। उन्होंने कहा, “मैं ऐसे रोल्स जरूर करना चाहती हूं जो मुझे चुनौती दें, लेकिन उनका मुझसे व्यक्तिगत स्तर पर जुड़ाव भी होना चाहिए। यह जरूरी है कि वह किरदार मेरे विकास में योगदान दे और दर्शकों तक सही तरीके से पहुंचे।”
दर्शकों की उम्मीदें और रचनात्मक संतुष्टि का संतुलन
तेजी से बदलती इंडस्ट्री में खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए ऐश्वर्या दर्शकों की अपेक्षाओं को समझती हैं। “दर्शक हमेशा कुछ नया देखना चाहते हैं। इसलिए मैं अलग-अलग जॉनर और अलग इमोशनल ग्राफ वाले किरदारों को एक्सप्लोर करती हूं, लेकिन साथ ही अपने मूल्यों के प्रति सच्ची रहती हूं।” उन्होंने यह भी बताया कि टाइपकास्टिंग से बचने के लिए उन्होंने कई प्रोजेक्ट्स ठुकराए हैं। “मैंने नेगेटिव रोल्स इसलिए मना किए, क्योंकि मुझे पता है कि मैं उन्हें बहुत अच्छे से निभा सकती हूं और फिर वही मेरी पहचान बन सकती है। मैं खुद को सीमित नहीं करना चाहती।”
दर्शकों की उम्मीदों और अपनी रचनात्मक संतुष्टि के बीच संतुलन बिठाना किसी भी कलाकार के लिए महत्वपूर्ण होता है। ऐश्वर्या कहती हैं, “यह सही बैलेंस बनाने की बात है। मैं अपने दर्शकों के प्यार की कद्र करती हूं, लेकिन साथ ही खुद को विकसित करना भी जरूरी मानती हूं। मैं ऐसे किरदार चुनती हूं जो अलग हों, लेकिन रिलेटेबल भी, ताकि मैं आगे बढ़ सकूं और दर्शकों से जुड़ी भी रहूं।”



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