बुन्देलखण्ड लिटरेचर फेस्टिवल कला-साहित्य और किसानो को दे रहा मंच, 14 अक्टूबर से शुरू होगा तीन दिवसीय फेस्ट 

झांसी: जैसा कि बुन्देलखण्ड के बारे में प्रचलित है कि यहां हमेशा ही प्रभावशाली व्यक्तित्वों ने जन्म लिया है और इस माटी की आत्मा को सहेजे रखने का प्रयास किया है। यूं ही नहीं आज बुन्देलखण्ड अपने आप में एक अनूठी एवं दिव्य विरासत है, इसे सहेजा गया है। प्राचीन समय से ही आविर्भाव से […]

Bolly Orbit
Bolly Orbit Verified Media or Organization • 25 Apr, 2026Super Admin
August 8, 2022 • 1:43 PM  0
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बुन्देलखण्ड लिटरेचर फेस्टिवल कला-साहित्य और किसानो को दे रहा मंच, 14 अक्टूबर से शुरू होगा तीन दिवसीय फेस्ट 
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8 Aug 2022
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बुन्देलखण्ड लिटरेचर फेस्टिवल कला-साहित्य और किसानो को दे रहा मंच, 14 अक्टूबर से शुरू होगा तीन दिवसीय फेस्ट 
बुन्देलखण्ड लिटरेचर फेस्टिवल कला-साहित्य और किसानो को दे रहा मंच, 14 अक्टूबर से शुरू होगा तीन दिवसीय फेस्ट 

झांसी: जैसा कि बुन्देलखण्ड के बारे में प्रचलित है कि यहां हमेशा ही प्रभावशाली व्यक्तित्वों ने जन्म लिया है और इस माटी की आत्मा को सहेजे रखने का प्रयास किया है। यूं ही नहीं आज बुन्देलखण्ड अपने आप में एक अनूठी एवं दिव्य विरासत है, इसे सहेजा गया है। प्राचीन समय से ही आविर्भाव से आधुनिकता की ओर बढ़ते मानवीय विकासों के अनेकों दौर आये, हर दौर में कुछ आधुनिकताओं को अपनाया गया और कुछ लुप्त होती विरासतों को बचाया गया। सभ्यताएँ विकसित होती गयीं मगर इस बुन्देली भूमि पर जन्मी अनेकों विभूतियों ने इस अंचल की आत्मा को न मरने दिया। आज भी भौतिकवाद की ओर बढ़ती मानव सभ्यताओं के बीच बुन्देलखण्ड अपनी एतिहासिक विरासतों और संस्कृतियों की पूंजी लिये विकास के समांतर खड़ा है।

जैसा कि अवधार्य है समय-समय पर इस भूमि की साहित्यिक , ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं कलात्मक विरासतों को सहेजे रखने के लिये अनेकों प्रयास किये गये, उन्हीं प्रयासों में आज एक नाम और जुड़ गया है, बुन्देलखण्ड साहित्य महोत्सव। बुन्देलखण्ड लिटरेचर फेस्टिवल (Bundelkhand Literature Festival, BLF) आज के आधुनिक समाज में नयी पीढ़ियों तक बुन्देलखण्ड की संस्कृति सौंपने का कार्य एक संरक्षक के रूप में बखूबी कर रहा है और इसे बल मिला है इसके संस्थापक चंद्रप्रताप सिंह उर्फ प्रताप राज के कुशल संचालन से। मूल रूप से तालबेहट जिला ललितपुर निवासी चन्द्र प्रताप सिंह पिछले कई वर्षों से बुन्देलखंड के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक स्तर एवं इसकी विशेषताओं पर शोध कर रहे थे जिसके परिणाम स्वरूप उन्होने बुन्देलखण्ड की इन तमाम धरोहरों को सहेजने का और अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया है जिससे बुन्देलखण्ड की ये अमूल्य विरासतें पीढ़ी-दर-पीढ़ी अनंत काल तक अपना प्रभाव बनाये रखें एवं केवल बुन्देलखण्ड ही नहीं अपितु देश भर के साहित्य, कला एवं संस्कृति के कद्रदानों के सानिध्य में इस पावन धरा की गरिमा को ऐसे ही अमूल्य बनाये रखें।

साहित्यिक धरोहरों को सहेजने का प्रयास है बुंदेलखंड लिटरेरी फेस्टिवल 

आज के भौतिकवाद की तरफ बढ़ते समाज के बीच चन्द्र प्रताप के इन प्रयासों को यथार्थ होने में बेशक कई कठिनाईयों का सामना करना पड़ा लेकिन अन्ततः उनके भरसक प्रयासों का परिणाम आज हमारे बीच बुन्देलखण्ड साहित्य महोत्सव के रूप में उपस्थित है। चन्द्र प्रताप सिंह के अनुसार जिस माटी में हमने जन्म लिया है उसकी विरासत को सहेजना हमारा ही कर्तव्य है। उनके अनुसार इस कार्यभार को प्रगतिशील रूप देने के एक साहित्य महोत्सव का चुनाव एक बेहतरीन विकल्प था जहां हम एक ही पंडाल के भीतर विभीन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्रों के विद्वानों एवं कलाकारों को एकत्रित कर सकते थे एवं समाज के विभिन्न रूपों, समस्याओं एवं विकास के अनेकों विचारों एवं अग्रिम विकल्पों पर चर्चाएं कर सकते थे।

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